जीवन के सत्य में ही छुपा है हंसी खुशी का राज


हमारे देश की सभ्यता, संस्कृति, रीति-रिवाज और परम्पराओं का अपना अलग ही महत्व है। हर रीति-रिवाज और परम्परा के पीछे आध्यात्मिक व वैज्ञानिक रहस्य तथा जन कल्याण की भावना सन्निहित है। अपनी अनुपम अद्वितीय सभ्यता, संस्कृति और परम्पराओं के बल पर ही भारत विश्वगुरु के सम्मानित और सर्वश्रेष्ठ उपाधि से विभूषित रहा।

एक बार विदेश में एक व्यक्ति मुझसे पूछने लगे, आपके देश की परम्पराएं समझ में नहीं आतीं, विचित्र परम्पराएं लगती हैं और ऐसी परम्पराएं हैं कि जिनका कोई तुक नहीं है। मैंने कहा कि अगर हिन्दुस्तान की परम्पराओं पर ध्यान दो तो हर परम्परा के पीछे बड़ा रहस्य छिपा है कि जिसका कोई मुकाबला नहीं किया जा सकता ।

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मैंने उन्हें बताया कि भारतीय परम्पराओं की तह पर जाओ, गहराई से समझो तब पता चलेगा कि क्या रहस्य है, कितना बड़ा संदेश छिपा है जैसे यह भी हमारे देश की परम्परा है कि जब कोई व्यक्ति दुनिया से विदा लेकर जाता है तो कैसी विचित्र परम्परा रखी गई है कि अर्थी लेकर जब लोग चलते हैं तो अर्थी आगे-आगे चलती है, लोग अर्थी के पीछे-पीछे चलते हैं और जब किसी का विवाह होता है, ब्याह-शादी का अवसर होता है, दूल्हा हमेशा ही पीछे-पीछे चला करता है और अन्य लोग आगे-आगे चला करते हैं, देखो यह विचित्र परम्परा है न!इतना सुनकर वह विदेशी सज्जन बोले, इसका मतलब? मैंने कहा मतलब सीधा साफ है जब अर्थी लेकर चलते हैं लोग पीछे-पीछे चल रहे होते हैं तो अर्थी की तरफ से यह संदेश दिया जाता है कि ऐ पीछे आने वाले इंसान। तू यह मत समझना कि तू इस दुनिया में सदा रहने के लिए आया है, जाना तो तुझे भी पड़ेगा एक न एक दिन। आज मैं आगे हूं तुम पीछे हो, कल तुम्हीं में से कोई न कोई आगे होगा और तुम्हीं में से कोई पीछे-पीछे छोड़ने के लिए आ रहा होगा। यह नितांंत सच है कि जिसका जन्म हुआ है उसकी मृत्यु भी निश्चित है और जैसे आज मैं कंधेे पर सवार होकर श्मशान भूमि की ओर जा रहा हूं, वैसा ही हाल तुम सब मेरे पीछे-पीछे आने वालों का होगा। किसी ने कहा है-हम भी गुस्ताखी करेंगे जिंदगी में एक बार।दोस्त सब पैदल चलेंगे और हम कंधों पर सवार।।न जाने कौन किसको छोड़ने के लिए जाएगा? किसके कंधों पर कौन होगा? लेकिन छोड़ना तो पड़ेगा संसार को अर्थी आगे-आगे चल रही है और अर्थी की तरफ से संदेश दिया जा रहा है, सभी पीछे चलने वाले बड़े ही शांत और गंभीर मुद्रा में बोलते जा रहे हैं- राम नाम सत्य है, हरि का नाम सत्य हैं। सत्य का मतलब है-सत्तावान और नित्य सदा रहने वाली वस्तु, इस संसार में तो हर वस्तु बदलने वाली है, सम्बन्धी भी सदा रहने वाले नहीं हैं। सब यहीं मिलेंगे और सब यहीं बिछुड़ेंगे, जो जीवन में कमाया है सब यहीं छूट जाएगा। इस संसार में कुछ सत्य है तो केवल भगवान का नाम ही है, बाकी सब मिथ्या है। इस बात को याद कराने के लिए एक व्यक्ति आगे-आगे बोलता जाता है और इसको फिर दूसरे लोग भी दोहराते जाते हैं। लेकिन अजीब बात तो यह है कि यह सभी जानते हैं -‘‘भगवान का नाम सत्य है।’’ ज्ञानी, ध्यानी और भगवान के भक्त लोग मंच पर बैठकर यह कहते भी है। श्मशान की ओर जा रही अर्थी यह संदेश देती है कि ओ धरती में रहने वाले इंसान! ये सारी दुनिया आज छूट गयी, धन छूट गया, वैभव छूट गया कोठी, बंगला, कार, घर-बार सब छूट गया। साथ जा रहा है तो केवल भगवान का नाम साथ जा रहा है। पीछे आने वाले इंसान तू भी याद रखना कि चिता तो एक दिन तेरी भी जलेगी, पता नहीं कब वो घड़ी आ जाए पर जो सत्य नाम है वो भगवान का नाम है, उसका सहारा जरूर लेना। तो बहुत बड़ी शिक्षा को देने के लिए यह परम्परा रखी गई है, अर्थी आगे चलती है लोग पीछे-पीछे चलते हैं। लेकिन जिस समय कोई व्यक्ति ब्याह-शादी करने के लिए विवाह के अवसर पर घोड़ी पर सवार होकर चलता है तो घोड़ी पर सवार दूल्हा सबसे पीछे रहता है और बारात के सभी लोग आगे-आगे चलते हैं। बारात जब चल रही होती है तो सबसे आगे बैंड-बाजा बज रहा होता है। अब उन कई तरह के साजों में एक विचित्र बात है जो दूल्हे को समझाई जाती है, बुजुर्ग लोग समझा रहे होते हैं कि देख बेटा! इन वाद्य यंत्रों में बज रहे संगीत को सुन और समझ। यह तेरे आगे-आगे बैण्ड बाजा है, उसके पीछे बच्चे नाचते हैं, उसके पीछे पगड़ियां बांधे हुए बुजुर्ग चल रहे हैं, सबसे पीछे तू दूल्हा बनकर चल रहा है तो बुजुर्गों की तरफ संदेश दिया जा रहा है, बताया जा रहा है कि तुम्हारी घर तुम्हारी गृहस्थी भी ऐसी ही होगी जैसे इस बैण्ड-बाजे में तरह-तरह के साज हैं, उसी तरह। इन साजों में कोई ऊंची आवाज वाला, कोई नीची आवाज वाला, कोई मीठी आवाज वाला, कोई तीखी आवाज वाला। इसी तरह से तेरे घर में भी कोई एक आवाज वाले लोग नहीं होंगे। होंगे तो अलग-अलग तरह आवाज वाले लोग होंगे, लेकिन जैसे इन बैंण्ड बाजे में सारे एक मीठी आवाज में एक होकर गा रहे हैं, मिलकर बोल रहे हैं तो संगीत पैदा हो गया है, ऐसे ही तू भी अपने घर में एकता रखना, तेरा घर में सुख-शान्ति आएगी और प्रसन्नता सदा नाचती रहेगी। इस बारात में एक और संदेश है कि इन बुजुर्गों को आगे रखकर चलना और खुद उनके पीछे चलना। बुजुर्गों को आगे रखने का मतलब है यह है कि तेरी सूझ-बूझ बहुत बड़ी है। इसलिए बेटा सच को जानना, स्वीकार करना और उसे मानना भी क्योंकि बुजुर्गों के पास जीवन का लम्बा अनुभव होता है, तजुर्बों की किताब होते हैं वे। जीवन में दुख भी, सुख, हानि-लाभ, जय-पराजय, मान-अपमान, दिन और रात की तरह बदलते रहेंगे सभी चक्रवत आएंगे, पर कभी इनसे विचलित नहीं होना और विवाह के समय बज रहे अलग-अलग वाद्य-यंत्रों में भी जैसे समरसता और माधुर्य का संगीत सुनाई देता है वैसे ही अपनी घर गृहस्थी के सुर को साधना और जीवन के सत्य परमपिता परमात्मा से हर समय अन्तरआत्मा से जुड़े रहना, यही हंसी-खुशी का राज है और जीवन का सत्य भी।

Published by Jai

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