जैसी मति वैसी प्राप्ति

गीता में श्री कृष्ण ने कहा है – जो जैसा भाव लेकर मेरे पास आता है, उस पर मैं उसी प्रकार से अनुग्रह करता हूँ , अर्थात उसकी मनोभावना के अनुरूप ही उसे फल प्रदान करता हूँ |

ईश्वर किसी के पास या किसी से दूर नहीं हैं | वे तो सबके अपने हैं | जो जिस भाव से उन्हें चाहता है , वे उसे उसी भाव से प्राप्त होते हैं |

ईश्वर अनंत भावमय हैं | अब यह तो व्यक्ति पर है की वह ईश्वर के किस भाव को जाग्रत कर उसके साथ अपने को युक्त करता है |

जैसे, रेडियो की कितनी ही ध्वनि – तरंगें हैं | व्यक्ति अपने रेडियो को जिस ध्वनि – तरंग पर रखेगा , वही सुन पायेगा |

जैसे टेलीविजन है | अपने दूरदर्शन यंत्र को व्यक्ति जिस चैनल पर रखेगा , वही दृश्य देख पायेगा |

अलग – अलग रेडियो में अलग – अलग कार्यक्रम सुनाई पड़ते हैं , उसी प्रकार अलग – अलग टेलीविजन सेटों में अलग – अलग दृश्य दिखाई देते हैं |

Jai

Published by Jai

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